सुविचार - "राष्ट्रभाषा हिंदी का किसी क्षेत्रीय भाषा से कोई संघर्ष नहीं है।" - अनंत गोपाल शेवड़े।

राजभाषा प्रकोष्ठ की पृष्ठ भूमि

लगभग 58 वर्ष पूर्व रुड़की विश्वविद्यालय (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के पूर्ववर्ती संस्थान) के गणित विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. चन्द्रिका प्रसाद, भूविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आर.एस.मित्तल, डॉ. के.के.सिंह तथा डॉ. आर.के.गोयल, वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली के निर्माण कार्य से विशेषज्ञ के रूप में जुड़े हुए थे।

राजभाषा के प्रयोग संबंधी अन्य क्षेत्रों जैसे कि हिन्दी समिति तथा हिन्दी विज्ञान-साहित्य परिषद के सदस्य के रूप में, वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी विषयों पर हिन्दी में शोध पत्र लिखकर, हिन्दी में जनोपयोगी वैज्ञानिक साहित्य के सृजन के द्वारा, कंप्यूटर पर हिन्दी में कार्य को सरल बनाकर व हिन्दी में वैज्ञानिक रिपोर्टों के प्रकाशन आदि के द्वारा भी संकाय सदस्यों ने राजभाषा की प्रगति में अत्यधिक योगदान दिया।

‘वैज्ञानिक कार्यों में हिन्दी का प्रयोग’ विषय पर 1965 में रुड़की विश्वविद्यालय में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें 04 शोध पत्र प्रस्तुत किये गये।

इसके 2 वर्ष बाद पुनः एक गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें हिन्दी के 6 शोध पत्र पढ़े गये। इसके कुछ ही समय उपरांत रुड़की विश्वविद्यालय के सीनेट हाल में एक बहुत विशाल प्रदर्शनी ‘हिन्दी का बढ़ता हुआ प्रयोग’ शीर्षक से लगाई गई जो कि पाँच दिन तक चली तथा इसे कई हजार लोगों ने देखा।

इस प्रदर्शनी से उत्साह प्राप्त करके पुनः हिन्दी की एक संगोष्ठी आयोजित की गई जिसका उद्घाटन रुड़की विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति श्री मुल्क राज चोपड़ा ने किया। इसमें 12 शोध पत्र पढे़ गये।

1978 में रुड़की विश्वविद्यालय में पुनः एक अखिल भारतीय हिन्दी संगोष्ठी आयोजित की गई जिसमें देश के सभी भागों से आये हुये विद्वानों द्वारा 44 हिन्दी शोध पत्र पढ़े गये । इस संगोष्ठी में 250 प्रतिनिधियों ने भाग लिया जिनमें पांच विश्वविद्यालयों के कुलपति, 2 राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के निदेशक तथा अनेक शीर्ष वैज्ञानिक सम्मिलित हुये। इस संगोष्ठी में सम्मिलित शोध पत्र इतने उच्च स्तर के पाये गये कि ‘द इंस्टीट्यूशन आफ इंजीनियर्स’ के जर्नल में इनको प्रकाशित करने के लिये एक विशेषांक निकालना पड़ा। इस संगोष्ठी का उद्घाटन देश के प्रसि़द्ध वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी की राष्ट्रीय समिति के अध्यक्ष डॉ. आत्माराम द्वारा किया गया।

22 अगस्त 1979 को रुड़की विश्वविद्यालय के गुणवत्ता अभिवृद्धि कार्यक्रम केन्द्र के अंतर्गत ‘हिन्दी माध्यम में तकनीकी शिक्षा, एक कालबद्ध योजना’ विषय पर पुनः एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें संस्थान के 11 वरिष्ठ प्रोफेसरों द्वारा हिन्दी में शोध पत्र प्रस्तुत किये गये।

5 से 7 जुलाई, 1984 तक रुड़की विश्वविद्यालय में, विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति प्रोफेसर भरत सिंह जी की अध्यक्षता में ‘ऊर्जा-संसाधन, विकास एवं परियोजनाएं’ विषय पर एक अखिल भारतीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें 35 विशेषज्ञों द्वारा हिन्दी में शोधपत्र प्रस्तुत किये गये।

23-24 सितम्बर 2009 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की में कंप्यूटर व हिंदी विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें भारत के विभिन्न भागों से आये 123 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

आयोजित होने वाले कार्यक्रम

  • Date : नवंबर माह, 2020

हिंदी वेबिनार

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