अक्‍सर पूछे जाने वाले प्रश्‍न

यह, भारत सरकार की राजभाषा नीति एवं इस संदर्भ में सरकार द्वारा समय समय पर दिए गए दिशा निर्देशों को संस्थान में समुचित रूप से लागू किए जाने एवं उनके अनुपालन को सुनिश्चित किए जाने के उद्देश्य से संस्थान द्वारा गठित एक सैल (प्रकोष्ठ) है ।


यह सैल, संस्थान के निदेशक की अध्यक्षता में गठित, संस्थान राजभाषा कार्यान्वयन समिति के दिशा निर्देशों पर कार्य करता है ।


हिंदी सैल द्वारा संस्‍थान कर्मियों के लिए हिंदी भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं हिंदी टंकण प्रशिक्षण कार्यक्रम, जो राजभाषा विभाग, नई दिल्‍ली द्वारा संचालित होते हैं, का आयोजन किया जाता है। इसके अतिरिक्‍त पूरे वर्ष में चार से अधिक हिंदी कार्यशालाओं तथा हिंदी दिवस पर विभिन्‍न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। कार्मिकों को उनके उत्‍कृष्‍ट हिंदी कार्यान्‍वयन के लिए पुरस्‍कृत किया जाता है। अंतरराष्‍ट्रीय मातृभाषा दिवस पर संस्‍थान के भिन्‍न भाषा-भाषी छात्रों के लिए बहुत सी प्रतियोगिताओं का आयोजन कर उन्‍हें पुरस्‍कृत किया जाता है। संस्‍थान की वार्षिक पत्रिका ‘मंथन’ का संपादन हिंदी प्रकोष्‍ठ से किया जाता है तथा उसके लिए कार्मिकों एवं छात्रों से लेख आमंत्रित किए जाते हैं।


राजभाषा वह भाषा होती है जिसे सरकारी कामकाज के लिये राजभाषा (Official Language) के रूप में चुना गया हो । भारत के संविधान के अनुच्छेद 363 के अनुसार हिंदी संघ ,यानि भारत सरकार की, राजभाषा है ।


यह देखते हुए कि भारत मे सब लोग हिंदी नहीं जानते, सरकार ने राजभाषा अधिनियम 1963 में यह प्रावधान किया कि सरकारी कामकाज हिंदी अथवा अंग्रेजी में किया जा सकता है । परंतु राजभाषा अधिनयम 1963 एवं राजभाषा नियम 1976 में ऐसे प्रावधान भी किए गए कि कुछ कार्य अनिवार्य रूप से हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में , तो कुछ कार्य केवल हिंदी भाषा में ही किए जाएं ।


इन कार्यों की एक विस्तृत सूची है, जिसे राजभाषा विभाग की वेब साइट www.rajbhasha.gov.in. पर राजभाषा अधिनियम 1963 तथा राजभाषा नियम 1976 में देखा जा सकता है ।


भारत सरकार की नीति राजभाषा नियमों का अनुपालन न किए जाने पर दण्ड की नहीं अपितु अनुपालन किए जाने हेतु प्रोत्साहन दिए जाने की नीति है । राजभाषा नियम 1976 के उपनियम 12 में कार्यालय के प्रशासनिक प्रधान को अपने कार्यकाल में राजभाषा नियमों का अनुपालन कराने का दायित्व सौंपा गया है ।


यद्यपि भारत सरकार या इसके अधीन अथवा इससे सम्बद्ध किसी कार्यालय, विभाग या संस्थान की सेवा में आने के लिए हिंदी का ज्ञान होना अनिवार्य नहीं है, परंतु ऐसा प्रावधान किया गया है कि सेवा में आ जाने के बाद ऐसे कर्मियों को जिन्हें हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान नहीं है, अनिवार्य रूप से हिंदी का सेवाकालीन प्रशिक्षण प्रदान कराया जाए ।


यह प्रशिक्षण सरकार द्वारा देश के अनेक नगरों में साथ ही पत्राचार द्वारा भी प्रदान किया जाता है ।


आई आई टी रुड़की अपने कर्मियों को भारत सरकार के प्रबोध, प्रवीण और प्राज्ञ पत्राचार पाठ्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षण उपलब्ध कराती है । पत्राचार पाठ्यक्रम को पूरा किए जाने के लिए संस्थान के हिंदी प्रकोष्ठ द्वारा अपने स्तर पर कक्षाएं चलाकर सहायता भी प्रदान की जाती है ।


आई.आई.टी. रुड़की एक ऐसा संस्‍थान है, जहां आए दिन शोध एवं अनुसंधान होते रहते हैं और ये सभी शोध सामान्‍य जन के जीवन से संबंधित होते हैं, फिर चाहे वह कोविड 19 के बारे में हो या कृषि से संबंधित हो। चूंकि ये शोध अंग्रेजी भाषा में किए जाते हैं और आम जन, कृषक वर्ग अंग्रेजी की अपेक्षा हिंदी भाषा को अच्‍छी तरह समझते हैं। अत: शोध की गई जानकारी को जब हिंदी में उन्‍हें बताया जाता है तो वह उनके लिए उपयोगी होती है। इसके अतिरिक्‍त आई.आई.टी. रुड़की केन्‍द्र सरकार के कार्यालय के अंतर्गत है और हिंदी भाषी क्षेत्र में आता है। इसलिए भारत सरकार के नियमानुसार हिंदी भाषा में अधिक से अधिक कार्य किए जाने का प्रावधान है।


एक लाभ तो यही है कि आप हिंदी में काम कर सकते है, इसके अतिरिक्त परीक्षा उत्तीर्ण कर लेने पर नकद पुरस्कार एवं एक वर्ष के लिए एक अतिरिक्त वेतन वृद्धि प्रदान किए जाने का भी प्रावधान है ।